ईलोजी की बारात – जालोर

March 17, 2014 | Posted in Updates

anand-bheru-2014-1

जालोर में होली के पर्व पर ईलोजी की बारात मुख्‍य आकर्षक का केन्‍द्र होता है। प्रतिवर्ष पारम्‍परिक रूप से शहर के भीतर माणक चौक स्थित राधेश्‍याम मंदिर में तैयार होकर ईलोजी मंदिर से ईलोजी की बारात बड़े ही धूमधाम के साथ राजसी ठाठ के साथ से रवाना होती है। बारात मे ईलोजी केसरिया साफा पहने तिलक धारण कर कमर में तलवार बांधकर राजसी ठाठ से घोड़ी पर सवार एवं शहर का हर वर्ग, जाति, धर्म के लोग बाराती बनकर चुंदरी व पंचरंगी साफा पहनकर बारात में शामिल होते है। बारात के आगे घोड़ो पर सवार ईलोजी के सुरक्षा गार्ड चलते है। इसके पीछे हाथी, उंट सहित बेंड एवं ढोल की धुन पर मदमस्‍त होकर युवा(बाराती) थिरकते नजर आते है। शहर के हर गली, मोहल्‍ले एवं चौराहे पर ईलोजी की बारात का स्‍वागत देखने के लिए लोगों की भीड़ सड़कों पर नजर आती है। ईलोजी की बारात होली दहन के समय भक्‍त प्रहलाद चौक पंहुचती है, वहां ईलोजी अपनी प्रमिका होलिका के जलने पर विलाप करते है। जालोर में होली पर्व पर ईलोजी की बारात का महत्‍व बहुत ही अधिक है।

किवदंती के अनुसार यह कहावत है कि ईलोजी का पूरा नाम विश्रवासु था एवं वे गंधर्व थे। वे इतने बलिष्‍ठ एवं ताकतवर थे कि वे कभी भी युद्धभूमि में नहीं हारते थे। होलिका हिरण्‍यकश्‍यप की बहन थी। उस समय हिरण्‍यकश्‍यप भी बलिष्‍ठ एवं ताकतवर राजा था। तथा अपने आप को भगवान मानता था। वहीं उसकी बहन होलिका, ईलोजी के शौर्य एवं बलवान होने से उस पर मोहित हो गई एवं शादी का प्रस्‍ताव रख दिया। ईलोजी ने भी शादी के प्रस्‍ताव को स्‍वीकार कर दिया। उधर हिरण्‍यकश्‍यप का पुत्र भक्‍त प्रहलाद था, जो अपने पिता को भगवान मानने को तैयार नहीं था। इसलिए उसने भक्‍त प्रहलाद को मारने के लिए कई योजना बनाई। लेकिन सभी विफल रही।

अंत में उसने अपनी बहन होलिका को भक्‍त प्रहलाद को जलाने के लिए कहा। होलिका भी ईलोजी से शादी के लिए हिरण्‍यकश्‍यप के कहे अनुसार भक्‍त प्रहलाद को आग में जलाने के लिए तैयार हो गई। वहीं होलिका ने ईलोजी को कहा कि भक्‍त प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठूंगी। जब भक्‍त प्रहलाद आग में जल जायेगा तब मेरा भाई हिरण्‍यकश्‍यप खुश होकर मेरी शादी आप से कर देगा। इसलिए उस समय तुम बारात लेकर आ जाना। ईलोजी होलिका के कहे अनुसार बारात लेकर रवाना होते है। उधर होलिका भक्‍त प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठ जाती है, लेकिन भक्‍त प्रहलाद भगवान का अवतार होने से वे तो जिन्‍दा बच जाते है और होलिका आग में जल जाती है। उसी समय ईलोजी अपनी बारात लेकर वहा पहूंच जाते है और अपनी प्रेमिका होलिका को आग में जलते देखकर विलाप करते हुए वहां से चले जाते है। जालोर शहर में गत कई वर्षो से ईलोजी की बारात निकालकर उस परम्‍परा का निर्वाह किया जाता है।

लेखक : हितेश माल (राष्ट्रदूत, जालोर)